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UPSC के छात्र नेगेटिव मार्किंग से कैसे बचें? जानिए संस्कृति IAS कोचिंग के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री अखिल मूर्ति सर से

IAS Coaching

UPSC सिविल सेवा परीक्षा में प्रावधान है कि यदि आप प्रारंभिक परीक्षा में सही प्रश्न हल करते हैं तो उम्मीदवार को अंक मिलते हैं, वहीं गलत उत्तर देने पर नंबरों में कटौती कर ली जाती है। आज के इस लेख में जानेंगे कि इस कटौती से कैसे बचें। इस विषय पर बात की है देश की सबसे प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान संस्कृति IAS Coaching के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री अखिल मूर्ति सर से।

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अखिल सर एक ऐसा नाम हैं, जिनसे मार्गदर्शन पाकर वर्तमान में हजारों अभ्यर्थी देश के उच्च प्रशासनिक पदों पर कार्यरत हैं। सर के प्रयासों से ही संभव हो पाया है कि हिन्दी माध्यम के छात्र IAS बनने के सपने को देखने के साथ उसे साकार भी कर रहे है। जानकार खुशी होगी कि सर हर उस छात्र तक पहुँचने का प्रयास कर रहे हैं, जो IAS बनने की इच्छा रखता है। 

चर्चा में सर से पूछा कि UPSC में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान कैसे लागू होता है?

सर ने बताया कि यह परीक्षा तीन चरणों में संपन्न होती है, जिसके पहले चरण में नेगेटिव मार्किंग के प्रावधान लागू होता है। यह प्रावधान प्रश्नों के गलत उत्तर देने पर लागू होता है,   जिसके तहत प्रश्न के निर्धारित अंक के एक-तिहाई अंक की कटौती कर ली जाती है। यह व्यवस्था प्रारंभिक चरण के दोनों प्रश्न-पत्रों पर लागू होती है। इस प्रावधान का मुख्य उद्देश्य है कि किसी छात्र को तुक्के लगाने का अनावश्यक लाभ न मिलने पाए। 

सर बताइए कि नेगेटिव मार्किंग से कैसे बचा जाए?

सर कहते हैं कि यह व्यवस्था गलत उत्तर देने पर लागू होती है। प्रयास यही करें कि सही प्रश्नों के ही उत्तर दें। नेगेटिव मार्किंग से दो तरह से बचा जा सकता है- पहला, तैयारी के दौरान अभ्यास से; दूसरा, परीक्षा के दौरान की रणनीति से

  • तैयारी के दौरान अभ्यास से:
  • सम्पूर्णता में अध्ययन करें
  • अध्ययन के बाद अभ्यास अवश्य करें 
  • अधिकाधिक बहुविकल्पीय प्रश्न हल करें
  • विगत वर्षों के प्रश्नों का अवलोकन करें; आदि
  • परीक्षा के दौरान रणनीति:
  • प्रश्नों को सावधानी से पढ़ें
  • प्रयास यही हो कि आ रहे प्रश्नों के उत्तर दें
  • तुक्का न लगाएं 
  • जिन प्रश्नों के दो विकल्पों में दुविधा है, निकटतम विकल्प चुने
  • जिन प्रश्नों के बारे में जानकारी नहीं है, उन प्रश्नों को बिलकुल हल न करें; आदि

आशा की जाती है कि सर द्वारा दी गई जानकारी से छात्र अवश्य लाभान्वित होंगे। इन छोटी-छोटी खामियों का सुधार छात्रों की सफलता की सम्भावना बढ़ा देगा। यदि कम समय में सफल होना कहते हैं तो तैयारी के सम्पूर्ण सफ़र में इस तरह के सुधार करते रहें।

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